Saturday, October 29, 2016

​​माँ संवेदना है तो पिता क्या है? ओम व्यास जी की कविता​​


माँ संवेदना है तो पिता क्या है? ओम व्यास जी की कविता
 ​​

पिता जीवन है, सम्बल है, शक्ति है,
पिता सृष्टी मे निर्माण की अभिव्यक्ती है,
पिता अँगुली पकडे बच्चे का सहारा है,
पिता कभी कुछ खट्टा कभी खारा है,
पिता पालन है, पोषण है, परिवार का अनुशासन है,
पिता धौंस से चलना वाला प्रेम का प्रशासन है,
पिता रोटी है, कपडा है, मकान है,
पिता छोटे से परिंदे का बडा आसमान है,
पिता अप्रदर्शित-अनंत प्यार है,
पिता है तो बच्चों को इंतज़ार है,
पिता से ही बच्चों के ढेर सारे सपने हैं,
पिता है तो बाज़ार के सब खिलौने अपने हैं,
पिता से परिवार में प्रतिपल राग है,
पिता से ही माँ की बिंदी और सुहाग है,
पिता परमात्मा की जगत के प्रति आसक्ती है,
पिता गृहस्थ आश्रम में उच्च स्थिती की भक्ती है,
पिता अपनी इच्छाओं का हनन और परिवार की पूर्ती है,
पिता रक्त निगले हुए संस्कारों की मूर्ती है,
पिता एक जीवन को जीवन का दान है,
​​
 पिता दुनिया दिखाने का एहसान है,
पिता सुरक्षा है, अगर सिर पर हाथ है,
पिता नहीं तो बचपन अनाथ है,
पिता नहीं तो बचपन अनाथ है,
तो पिता से बडा तुम अपना नाम करो,
पिता का अपमान नहीं उनपर अभिमान करो,
क्योंकि माँ-बाप की कमी को कोई बाँट नहीं सकता,
और ईश्वर भी इनके आशिषों को काट नहीं सकता,
विश्व में किसी भी देवता का स्थान दूजा है,
माँ-बाप की सेवा ही सबसे बडी पूजा है,
विश्व में किसी भी तिर्थ की यात्रा व्यर्थ हैं,
यदि बेटे के होते माँ-बाप असमर्थ हैं,
वो खुशनसीब हैं माँ-बाप जिनके साथ होते हैं,
क्योंकि माँ-बाप के आशिषों के हाथ हज़ारों हाथ होते हैं
क्योंकि माँ-बाप के आशिषों के हाथ हज़ारों हाथ होते हैं​I

Wednesday, October 19, 2016

अमीर बनना है तो अपनाएं अरबपति वारेन बफे की इन 10 मन्त्रों को !

दुनिया के सबसे अमीर लोगों में शुमार वारेन बफे को कौन नही जानता? वो न केवल शेयर मार्केट के बादशाह हैं बल्कि दुनिया के सबसे बड़े दानी भी हैं। उन्होंने अपने जीवन में कमाई हुयी अधिकतर सम्पति को दान कर दिया है जिसके कारण उन्हें 21वी सदी का सबसे बड़ा दानवीर कहा जाता है।
                                        दुनिया का सबसे महान निवेशक – वारेन बफे
बचपन से ही उनको पैसे कमाने की इतनी ललक थी कि वो साइकिल से रोज सुबह अख़बार बेचने जाते थे। जब वो केवल 15 वर्ष के थे तब वो अख़बार बांटकर 175 डॉलर हर महीने कमाते थे और उन पैसो को उन्होंने निवेश में लगा दिया था। आपको जानकर ताज्जुब होगा कि वारेन बफे ने कॉलेज पूरा होने से पहले 90,000 डॉलर कमा लिए थे। इसके बाद उन्हें महसूस हो गया था कि निवेश से ही पैसा बनाया जा सकता है और इसी मंत्र के बलबूते पर उन्होंने अपना multi billion dollar साम्राज्य खड़ा कर दिया। आज हम उसी दुनिया के सबसे सफल निवेशक वारेन बफे के धन कमाने के 10 जादुई मन्त्र आपसे share कर रहे हैं।
Money Making Tips in Hindi (Paise Kamane ke Tarike) पैसे कमाने के 10 मंत्र

1) लाभ का निवेश करें

बूंद बूंद से ही सागर बनता है इसलिए अगर छोटी-छोटी रकम की बचत की जाए तो एक समय यह एक बड़ी सम्पति के रूप में तब्दील हो जायेगी। बहुत से लोग लाभ का निवेश करने के बजाय उसे अपनी जरूरत में लगा देते है जबकि वारेन बफे का मन्त्र ये है कि अगर लाभ का 50 प्रतिशत हिस्सा फिर से निवेश किया जाए तो इससे आपके व्यवसाय मे काफी बढ़ोतरी होगी। अगर आपने मुनाफ़े की आदत डाल दी तो चक्रवृद्धी ब्याज का जादू आपको अमीर बनाता जाएगा।

2) लिंक से हटकर चलें 

शेयर मार्केट या अपने व्यवसाय में अगर आप लिंक से हटकर चलेंगे तो आपको बहुत फायदा होगा क्योंकि उससे आपकी एक अलग पहचान विकसित होगी। लिंक से हटकर चलने के लिए आपको अपनी मौलिक सोच को विकसित करना होगा। इसके लिए आप झुंड का हिस्सा ना बने। निवेश का कोई भी निर्णय दूसरों के कहने पर लेने की जगह अपने विवेक के आधार पर लें जिससे आपका आत्मविश्वास भी बढ़ेगा और आपको आपनी सोच के बारे में भी पता चलेगा कि किस जगह आप सही या गलत कर रहे हैं।

3) दुविधा से बचें 

जो लोग दुविधा की स्तिथि में फंसे रहते है वो आसानी से सुनहरे अवसर को भी गँवा बैठते है। निवेश का फैसला तेजी से लें और इसके लिए उपलब्ध सूचनाओं की पड़ताल करें। निवेश के लिए शुरुवात में आपको जल्दी फैसले लेने में दिक्कत होगी लेकिन जल्द ही आप शीघ्र फैसले लेने के फायदे को समझ जायंगे।

4) निर्णय लेने से पहले सौदे को समझ लें

कोई भी निर्णय लेने से पहले सौदे को अच्छी तरह से समझ लेना चाहिए। सौदे से आपको किस तरह का फायदा हो सकता है इस बात पर अच्छी तरह से विचार कर लें। किसी भी कागज पर हस्ताक्षर करने से पहले उसे अच्छी तरह पढ़ लें। निर्णय करने की जल्दबाजी में लोग कुछ महत्वपूर्ण चीजो को फिर से चेक करना भूल जाते हैं। इसमें निवेश के कार्य में आपको जल्दबाजी के साथ विवेक का भी उपयोग् करना होगा जो आपको अनुभव के साथ आता जाएगा।

5) छोटे खर्चो पर नियन्त्रण रखें 

अगर आपको ऐसा लगता है कि आप बड़े खर्चों को नियन्त्रण में लाकर निवेश में सफल हो सकते हैं तो आपकी ये अवधारणा गलत है क्योंकि बहुत बार छोटे-छोटे खर्चे आपके लिए अधिक नुकसानदायक साबित हो सकते हैं। कोई भी खर्च करने से पहले विचार करें कि क्या ऐसा करना उचित रहेगा या नही। जिस तरह बूंद-बूंद से सागर भर सकता है उसी तरह बूंद-बूंद निकलने से सागर खाली भी हो सकता है! छोटे-छोटे खर्च मिलकर इतने बड़े हो जाते हैं कि वे आपके अमीर बनने के सपनो को कभी पूरा नहीं होने देते।

6) कर्ज को नियंत्रित करें

अगर आप कर्ज और क्रेडिट कार्ड के सहारे जीने की आदत डालोगे तो कभी अमीर नही बन पाओगे। कर्ज के जरिये भले ही आप अपनी जीवन शैली में सुधार लाने की कोशिश कर सकते हैं लेकिन कर्ज के बोझ तले दबकर आप अपनी वित्तीय स्तिथि में सुधार नही ला सकते हैं। कई निवेशक खूब सारा पैसा बैंको से उधार ले लेते है लेकिन बाद में उनको केवल उधार चुकाने में सारा जीवन निकल जाता है। उधार उतना ही लें जितना आप एक निश्चित समय में चुका सकें।

7) निरन्तरता बनाये रखें 

अगर आप ऐसा सोचते है कि जो काम आप कर रहे है वो महत्वपूर्ण और सही है तो निरन्तरता बनाये रखें। अपने लक्ष्य की दिशा में मजबूती के साथ कदम बढ़ाते रहें। निरंतरता जीवन के हर व्यवसाय या कार्य में जरुरी है। जब तक कोई तार्किक या बड़ी वजह ना हो चीजों कि बीच में ही नहीं छोड़ देना चाहिए, ऐसा करने से कुछ हासिल नहीं होता, बल्कि आपने पहले से जो समय और धन लगाया वो भी नुक्सान हो जाता है।

8) नुकसान से दूर रहें  

किसी भी निवेश के दौरान जब आपको लगे कि नुकसान हो रहा है तो तुरंत उससे अलग हो जाने का निर्णय बना लें। हाथ पर हाथ धरे रहकर बैठने का अर्थ है ओर अधिक नुकसान का सामना करना। कई निवेशक अंतिम समय तक इंतजार करते हैं लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी होती है इसलिए नुकसान के सौदे में समय से पहले ही हाथ खड़े कर देने चाहिए।

9) जोखिम का आंकलन करे

जब भी आप निवेश का कोई निर्णय लेना चाहे तो सबसे पहले भावी परिणामो के बारे में विचार करे। जोखिम का आंकलन करे क्योंकि जोखिम का आकलन करने पर ही आप उचित निर्णय ले सकते हैं। हर इंसान की जोखिम लेने की अपनी क्षमता होती है, आप दूसरों को देखकर अपने निवेश का फैसला न करें बल्कि अपनी risk appetite के हिसाब से इन्वेस्ट करें।

10) सफलता का सही अर्थ समझें 

प्रत्येक व्यक्ति के लिए सफलता के अलग अलग मायने होते हैं। केवल पैसे जमा करना ही सफलता नही है। जिन बातो से जीवन अर्थपूर्ण बनता है उन बातो की तरफ ध्यान देना भी सफलता का अहम हिस्सा है। आप जिन लोगो का प्यार पाना चाहते है उनमे से कितने लोग वास्तव में आपको प्यार करते है इसी बात से सच्ची सफलता का मतलब समझा जा सकता है। आप अपने निवेश को अपनी सफलता से जोड़ कर देखें और अपनी investment strategy में लगातार सुधार करते हुए सफलता प्राप्त करें।
तो मित्रो अगर आप वारेन बफे के इन 10 जादुई मन्त्रो का उपयोग निवेश में करेंगे तो ना केवल आप अमीर बन सकते है बल्कि वारेन बफे की तरह एक सफल व्यक्ति भी बन सकते है।

Wednesday, May 27, 2015

10 Basic principle to invest in stock market

10 Basic Principal to invest in Stock market 

In the stock market there is no rule without an exception, there are some principles that are tough to dispute. Here are 10 general principles to help investors get a better grasp of how to approach the market from a long-term view. Every point embodies some fundamental concept every investor should know.

1. Ride the winners not the losers

Time and time again, investors take profits by selling their appreciated investments, but they hold onto stocks that have declined in the hope of a rebound. If an investor doesn't know when it's time to let go of hopeless stocks, he or she can, in the worst-case scenario, see the stock sink to the point where it is almost worthless. Of course, the idea of holding onto high-quality investments while selling the poor ones is great in theory, but hard to put into practice. The following information might help:

Riding a Winner - The theory is that much of your overall success will be due to a small number of stocks in your portfolio that returned big. If you have a personal policy to sell after a stock has increased by a certain multiple - say three, for instance - you may never fully ride out a winner. No one in the history of investing with a "sell-after-I-have-tripled-my-money" mentality has ever had a tenbagger. Don't underestimate a stock that is performing well by sticking to some rigid personal rule - if you don't have a good understanding of the potential of your investments, your personal rules may end up being arbitrary and too limiting.

Selling a Loser - There is no guarantee that a stock will bounce back after a decline. While it's important not to underestimate good stocks, it's equally important to be realistic about investments that are performing badly. Recognizing your losers is hard because it's also an acknowledgment of your mistake. But it's important to be honest when you realize that a stock is not performing as well, as you expected it to. Don't be afraid to swallow your pride and move on before your losses become even greater.

In both cases, the point is to judge companies on their merits according to your research. In each situation, you still have to decide whether a price justifies future potential. Just remember not to let your fears limit your returns or inflate your losses.

2. Avoid chasing hot tips

Whether the tip comes from your brother, your cousin, your neighbour or even your broker, you shouldn't accept it as law. When you make an investment, it's important you know the reasons for doing so; get into the basics by doing research and analysis of any company before you even consider investing your hard-earned money. Relying on a tidbit of information from someone else is not only an attempt at taking the easy way out, it's also a type of gambling. Sure, with some luck, tips sometimes pan out but they will never make you an informed investor, which is what you need to be to be successful in the long run. Find out what you should pay attention to - and what you should ignore.

3. Don't sweat on the small stuff

As a long-term investor, you shouldn't panic when your investments experience short-term movements. When tracking the activities of your investments, you should look at the big picture. Remember to be confident in the quality of your investments rather than nervous about the inevitable volatility of the short term. Also, don't overemphasize the few bucks difference you might save from using a limit versus market order.

Active traders will use these day-to-day and even minute-to-minute fluctuations as a way to make gains. But the gains of a long-term investor come from a completely different market movement - the one that occurs over many years - so keep your focus on developing your overall investment philosophy by educating yourself.

4. Don't overemphasize the P/E ratio

Investors often place too much importance on the price-earnings ratio (P/E ratio). Because it is one key tool among many, using only this ratio to make buy or sell decisions is dangerous and ill-advised. The P/E ratio must be interpreted within a context, and it should be used in conjunction with other analytical processes. So, a low P/E ratio doesn't necessarily mean a security is undervalued, nor does a high P/E ratio necessarily mean a company is overvalued.  

5. Resist the lure of penny stocks

A common misconception is that there is less to lose in buying a low-priced stock. But whether you buy a Rs. 5 stock that plunges to Rs. 0 or a Rs. 75 stock that does the same, either way you've lost 100% of your initial investment. A lousy Rs. 5 company has just as much downside risk as a lousy Rs. 75 company. In fact, a penny stock is probably riskier than a company with a higher share price, which would have more regulations placed on it.

6. Pick a strategy and stick with it

Different people use different methods to pick stocks and fulfill investing goals. There are many ways to be successful and no one strategy is inherently better than any other. However, once you find your style, stick with it. An investor who flounders between different stock-picking strategies will probably experience the worst, rather than the best, of each. Constantly switching strategies effectively makes you a market timer, and this is definitely most investors should avoid. Take Warren Buffett's actions during the dotcom boom of the late '90s as an example. Buffett's value-oriented strategy had worked for him for decades, and - despite criticism from the media - it prevented him from getting sucked into tech startups that had no earnings and eventually crashed.

7. Focus on the future

The tough part about investing is that we are trying to make informed decisions based on things that have yet to happen. It's important to keep in mind that even though we use past data as an indication of things to come, it's what happens in the future that matters most.

A quote from Peter Lynch's book "One Up on Wall Street" (1990) about his experience with one of the stock he bought demonstrates this: "If I'd bothered to ask myself, 'How can this stock go any higher?' I would have never bought it as stock price already went up twenty fold. But I checked the fundamentals, realized that company was still cheap, bought the stock, and made seven fold after that." The point is to base a decision on future potential rather than on what has already happened in the past.

8. Adopt a long-term perspective.

Large short-term profits can often entice those who are new to the market. But adopting a long-term horizon and dismissing the "get in, get out and make a killing" mentality is a must for any investor. This doesn't mean that it's impossible to make money by actively trading in the short term. But, as we already mentioned, investing and trading are very different ways of making gains from the market. Trading involves very different risks that buy-and-hold investors don't experience. As such, active trading requires certain specialized skills.

Neither investing style is necessarily better than the other - both have their pros and cons. But active trading can be wrong for someone without the appropriate time, financial resources, education and desire.

9. Be open-minded

Many great companies are household names, but many good investments are not household names. Thousands of smaller companies have the potential to turn into the large blue chips of tomorrow. In fact, historically, small-caps have had greater returns than large-caps; over the decades.

This is not to suggest that you should devote your entire portfolio to small-cap stocks. Rather, understand that there are many great companies beyond those in the Small Cap Index, and that by neglecting all these lesser-known companies, you could also be neglecting some of the biggest gains.

10. Don't miss to diversify your equity portfolio

Its always wise to have stocks from different sectors and Industries. Do not expose your self to many stocks from the same sector. Be it IT, Consumers, Finance, Infrastructure, Pharmaceutical or any other sector, you must have a proper mix of all with suitable allocation based on future outlook of that sector and industry. Most of the companies from capital goods and Infrastructure sector have not performed since last 4 to 5 years but private banking stocks, consumers and pharmaceuticals companies stocks are making new all time highs. Hence, its important to stay diversified with your stock investments.

Monday, October 29, 2012

10000 Hours Rule : Be own fields expert

10000 Hour Rule : बने अपने Field के Expert



10,000 Hours Rule in Hindi

Be an expert!






Exceptional performers पैदा होते हैं या practice के through बनते हैं ; ये debate बहुत पहले से चलती आ रही है ….दोनों view points को support और oppose करने वाले बहुत से लोग मिल जायेंगे . जहाँ तक मेरी बात है तो मेरा 100% मानना है की अपनी मेहनत से एक exceptional performer बना जा सकता है ….अब अगर कोई पैदाइशी ऐसा हो या न हो उससे क्या करना है …main बात तो ये है कि ऐसा बनना संभव है . और आज इस article में मैं ऐसा ही एक rule share कर रहा हूँ जो आपको आपके chosen field of work में EXPERT बनने  में helpful होगा .और ये हर एक तरह के काम के लिए applicable होगा …चाहे वो पढ़ाने का काम हो , खाना बनाने का ,make up करने का , singing, dancing, sports या कुछ और . इसलिए आप इसे नज़रंदाज़ नहीं कर सकते .तो आइये जानते हैं इस rule के बारे में जिसे हम कहते हैं :

10,000 Hour Rule

10k hour rule is an idea that it takes approximately 10000 hours of deliberate practice to master a skill.

ये एक simple idea है जो कहती है कि किसी भी skill को master करने के लिए 10,000 घंटे की deliberate practice की ज़रुरत होती है .दूसरे शब्दों में कहें तो यदि कोई व्यक्ति किसी भी चीज में महारथ हांसिल करना चाहता है तो उसे कम से कम वो काम 10,000 घंटे करना होगा .

चलिए पहले इस rule को high-level पे check करते हैं . अगर Sports की बात करें तो Sachin Tendulkar एक expert batsman माने जाते हैं , तो क्या ऐसा बनने से पहले उन्होंने 10,000 घंटे की practice की थी ????….I think ज़रूर की थी . Sachin 16 years की age में Indian team में शामिल हुए ,और वो तबसे cricket खेलते थे जब वो ठीक से bat भी नहीं पकड़ पाते थे . अगर ये मान के चले कि वो 6 साल के थे तबसे cricket खेलना  शुरू  किया  तो भी team में आने से पहले उन्होंने 10 साल तक cricket खेली . मतलब कि अगर वो रोज़ 3 घंटे से भी कम खेले होंगे तो भी वो team में आने से पहले 10,000 घंटे की practice कर चुके थे .
बिल गेट्स भी हार्वर्ड छोड़ने से पहले १०,००० घंटे की प्रोग्रामिंग कर चुके थे,आप कोई  भी field उठा कर देख लें मंझे हुए actors, doctors, professors, ये सभी कड़ी मेहनत और हज़ारों घंटों की practice के बाद ही एक अलग मुकाम पर पहुँच पाते हैं .

It means कि इस rule में कुछ तो बात है !!! पर आप ये भी सोच सकते हैं कि इसमें ऐसा नया क्या है …हम तो बचपन से सुनते आ रहे हैं कि ," there is no substitute for hard work….परिश्रम से ही सफलता मिलती है and …blah..blah.."

Hmmm…बात तो सही है पर is rule में कुछ ख़ास है …इससे पहले कड़ी मेहनत defined नहीं थी पर यहाँ पर इसे define किया गया है …." 10000 घंटे की deliberate practice."

और यही बात इसे विशेष बनाती है . Friends, जब किसी goal के साथ number जुड़ जाते हैं तो वही साधारण goal SMART Goal बन जाता है .और यही बात 10K rule के साथ है ; Gladwell ने कड़ी मेहनत को एक number दे दिया है 10K hrs की deliberate practice. इसलिए आपको एक सही direction और aim मिल जाता है कि कितनी मेहनत करनी है .आप ये भी ध्यान दें कि यह मेहनत सिर्फ सफलता पाने भर के लिए नहीं है ये उससे बढ़कर है ….Exceptional बनने की ….. अद्वितीय बनने की , engineers में best engineer बनने की , teachers में best teacher बनने की , designers में best designer बनने की ….!

इस rule में जो सबसे important point है वो है , "deliberate practice" यानि जान बूझ कर उस काम में महारथ हांसिल करने के लिए काम करना . क्योंकि बस यूँहीं या मजबूरी में तो बहुत लोग काम करते हैं पर जो Master होते हैं वो इसी aim के साथ वो काम करते हैं कि उसमे उन्हें mastery करनी है . वे लगातार अपने काम में सुधार लाते हैं ,एक -एक चीज को बारीकी से समझते हैं और उसमे अपने आप को improve करते जाते हैं , वे आसानी से satisfy नहीं होते और हमेशा improvement की तालाश में रहते हैं .

यही वजह है कि बहुत लोग बीसियों साल एक ही तरह का काम करने के बावजूद उसमे average ही होते हैं , वो खुद को improve करने के लिए कोई खास effort नहीं डालते हैं !!

OKKK. Rule तो जान liya है पर अब इसका करना क्या है ?

अब आपको अपनी chosen field में Expert बनना है , पर इससे पहले अगर आपके मन में सवाल आ रहा हो कि expert क्यों बने तो यहाँ click कीजिये .

Friends, Expert बनने के लिए आपको तीन चीजें करनी होंगी :

1) आपको decide करना होगा कि आप किस area में Expert बनना चाहते हैं ?

2) कितने समय में बनना चाहते हैं ?

3) और आपको हिसाब लगाना होगा की आपको हर रोज़ कितने hours तक deliberate practice करनी होगी , और फिर आपको उसे reality में करना होगा.

पहला point आपको  decide करना है कि आप किस field में expert बनना चाहते हैं , दूसरे में आपको ये तय करना है कि आप कितने समय में , say 5 साल में या 10 साल में expert बनना चाहते हैं और तीसरे में आपको थोड़ी calculation करनी होगी .

For example अगर आप अगले 5 साल में एक Master Chef बनना चाहते हैं तो आपको हर रोज़ ( (10,000/(5*365)) =5 .47 घंटे उस काम की practice करनी होगी . ये scratch से expert बनने के लिए चाहिए , पर यदि आप पहले से ही इस काम में आगे बढ़ चुके हैं तो आपको कम समय लगेगा. और हर रोज़ का ये मतलब नहीं है की आप बीच में ब्रेक नहीं ले सकते , पर ध्यान दें की आपकी continuity ज्यादा दिन के लिए ब्रेक न हो.

I hope ये rule जानने के बाद आपको अपनी life plan करने में और उसे एक सही direction देने में मदद मिलेगी. Specially जो लोग young हैं वो अभी से किसी particular skill को मास्टर करने के लिए प्लान कर सकते हैं. समय बहुत तेजी से बीतता है,आप कब अपने consistent focused efforts से एक एक्सपर्ट बन जायंगे आपको पता भी नहीं चलेगा.

Friends, कई बार मंजिल तक पहुँचने का रास्ता खुद मंजिल से ज्यदा rewarding होता है, और शायद एक्सपर्ट बनने का रास्ता भी कुछ ऐसा ही है….तो आइये हम सब साथ निकल पड़ते हैं अपनी-अपनी मंजिल की तरफ.

Thursday, October 25, 2012

Inspiration from nature in Hindi

प्रक्रिति से लें प्रेरणा


प्रेरणादायी प्रक्रिति






जीवन में ज्ञान और प्रेरणा कहीं से भी एवं किसी से भी मिल सकती है। मित्रों आज मैंने एक कविता पढ़ी , पढकर लगा कि प्रकृति ऐसे अंनत कारणों से भरी हुई है, जो हमें सिखाती है कि जीवन हरपल आनंद से सराबोर है। नदियों का कल कल करता संगीत, झूमते गाते पेङ, एवं छोटे छोटे जीव हमें सिखाते हैं कि जीवन को ऐसे जियो कि जीवन का हर पल खुशियों की सौगात बन जाये।

मैं आपके साथ भी वह कविता बांटना चाहुँगी:

कुकङु कू कहता मुर्गा, जागो जागो ओ नादान

शीध्र सवेरे उठने वाला, पाता है बल विद्यामान।

कू-कू करती कहती कोयल, मीठी बात हमेशा बोल

मेल जोल ही बङी चीज है, कभी न लेना झगङा मोल।

चीं-चीं करती कहती चिङिया हमको बारंबार

संघटन में शक्ती है बङी, दुश्मन जाता जिससे हार।

उपरोक्त कविता में कितनी आसानी से जीव जंतुओं ने अपनी अच्छाईयों से जीवन को संवारने का संदेश दिया है। ऐसे कई जीव हैं जो हमे सकारात्मक जीवन की प्रेरणा देते हैं। कुनबे के साथ रहने वाली चींटी, संर्घष और मेहनत का सजीव उदाहरण है। डॉ. हरिवंश राय बच्चन जी ने अपनी कविता हिम्मत करने वालों की हार नही होती के माध्यम से चीटियों के संर्घष को बहुत ही खूबसूरती से परिलाक्षित किया है।

नन्ही चींटी जब दाना लेकर चलती है,

चढती दिवारों पर सौ बार फिसलती है,

मन का विश्वास रगों में साहस भरता है,

चढ कर गिरना, गिरकर चढना न अखरता है

आखिर उसकी मेहनत बेकार नही होती ,

कोशिश करने वालों की हार नही होती।

चीटियाँ सिखाती हैं कि स्वयं पर भरोसा रखें। दस में से नौ बार असफल होने के बाद भी हारने के बजाय दोगुने परिश्रम से प्रयास करना ही जीत है। बिना किसी खौफ और रुकावट के आसमान की ऊँचाइयों को छूते बाज के हौसले हमें सिखाते हैं कि राह में आने वाली अङचनों को नये अनुभव का आधार माने। ऊँची सोच रखें, सारा आकाश आपका है।

आत्मसम्मान के साथ जीने का साहस पपीहा एवं राजहंस से सीखा जा सकता है। आत्मविश्वास से लबरेज ये जीव, परिस्थिती से जूझने व आगे बढने की शिक्षा देते हैं। सर्वदा सत्य है कि उत्साह समस्त प्रगती का स्रोत है। मधुमक्खियों की दिनचर्या इस बात का जीता जागता उदाहरण है।

शोधकर्ताओं द्वारा किये अध्ययन से ये साबित हो गया है कि सुबह मधुमक्खियों की पराग इक्कठा करने की क्षमता बेहतर होती है। उङने वाले कीटों में ये सबसे अधिक उपयोगी है। इसकी खासियत है कि ये अपनी रक्षा के लिये हर चुनौती का सामना दिलेरी से करती है। इसका छत्ता प्राकृतिक इंजीनियरिंग का बेजोङ नमूना है। शहद बनाने के कौशल के साथ-साथ यह परागण में मदद कर परहित कार्य भी करती है। इनका जीवन हमें संदेश देता है कि यदि हममे उत्तसाह है तो हम कुछ भी कर सकते हैं। उत्साह है तो सफलता है।

कुछ समय पहले की घटना है। ब्रीटेन में एक बच्चा फिनले, मस्तिष्कघात का शिकार हो गया था। डॉ. के अनुसार वे ताउम्र अपने पैरों पर खङा नही हो सकता था। एक दिन उसकी माँ उसके लिये एक बतख का बच्चा ले कर आई किन्तु संयोगवश उसके पैर में कुछ दिक्कत थी। बतख को पशु चिकित्सक को दिखाया गया। चिकित्सक ने हड्डी जोङने के लिये बतख के पैर में लकङी का टुकङा बाँध दिया। फिनले और बतख की दोस्ती हो गई। फिनले बतख की चाल को बङे गौर से देखता और उसकी नकल कर चलने की कोशिश भी करता। परिणाम ये हुआ की बच्चा चलने लगा।

ऐसी अनगिनत कहानियाँ हैं, जिनमें छोटे-छोटे जीव जन्तुओं ने इंसान के जीवन को अपनी अच्छाइयों से खुशनुमा बना दिया है। मित्रों, यदि हमें जीवन में सफलता के स्वर्णिम सोपानों पर चढना है तो प्रकृति की सभी रचना को सकारात्मक दृष्टीकोंण से देखना चाहिये क्योंकि ऐसा कोई अक्षर नही है, जो मंत्र न हो, ऐसा कोई पौधा नही जो औषधी न हो, ऐसा कोई जीव नही जो जीवन की सच्चाईयों से हमें रूबरू न कराता हो।

प्रकृती का कण-कण जिंदगी की सच्चाई को बंया करता है, जिसे जीवन में अपनाकर जिंदगी को खुशनुमा एवं आनंदमय बना सकते हैं।

Wednesday, October 24, 2012

महात्मा जी की बिल्ली

एक बार एक महात्माजी अपने कुछ शिष्यों के साथ जंगल में आश्रम बनाकर रहते थें, एक दिन कहीं से एक बिल्ली का बच्चा रास्ता भटककर आश्रम में आ गया । महात्माजी ने उस भूखे प्यासे बिल्ली के बच्चे को दूध-रोटी

Cat In Hindi Motivational Story

महात्मा जी की बिल्ली

खिलाया । वह बच्चा वहीं आश्रम में रहकर पलने लगा। लेकिन उसके आने के बाद महात्माजी को एक समस्या उत्पन्न हो गयी कि जब वे सायं ध्यान में बैठते तो वह बच्चा कभी उनकी गोद में चढ़ जाता, कभी कन्धे या सिर पर बैठ जाता । तो महात्माजी ने अपने एक शिष्य को बुलाकर कहा देखो मैं जब सायं ध्यान पर बैठू, उससे पूर्व तुम इस बच्चे को दूर एक पेड़ से बॉध आया करो। अब तो यह नियम हो गया, महात्माजी के ध्यान पर बैठने से पूर्व वह बिल्ली का बच्चा पेड़ से बॉधा जाने लगा । एक दिन महात्माजी की मृत्यु हो गयी तो उनका एक प्रिय काबिल शिष्य उनकी गद्दी पर बैठा । वह भी जब ध्यान पर बैठता तो उससे पूर्व बिल्ली का बच्चा पेड़ पर बॉधा जाता । फिर एक दिन तो अनर्थ हो गया, बहुत बड़ी समस्या आ खड़ी हुयी कि बिल्ली ही खत्म हो गयी। सारे शिष्यों की मीटिंग हुयी, सबने विचार विमर्श किया कि बड़े महात्माजी जब तक बिल्ली पेड़ से न बॉधी जाये, तब तक ध्यान पर नहीं बैठते थे। अत: पास के गॉवों से कहीं से भी एक बिल्ली लायी जाये। आखिरकार काफी ढॅूढने के बाद एक बिल्ली मिली, जिसे पेड़ पर बॉधने के बाद महात्माजी ध्यान पर बैठे।

विश्वास मानें, उसके बाद जाने कितनी बिल्लियॉ मर चुकी और न जाने कितने महात्माजी मर चुके। लेकिन आज भी जब तक पेड़ पर बिल्ली न बॉधी जाये, तब तक महात्माजी ध्यान पर नहीं बैठते हैं। कभी उनसे पूछो तो कहते हैं यह तो परम्परा है। हमारे पुराने सारे गुरुजी करते रहे, वे सब गलत तो नहीं हो सकते । कुछ भी हो जाये हम अपनी परम्परा नहीं छोड़ सकते।

यह तो हुयी उन महात्माजी और उनके शिष्यों की बात । पर कहीं न कहीं हम सबने भी एक नहीं; अनेकों ऐसी बिल्लियॉ पाल रखी हैं । कभी गौर किया है इन बिल्लियों पर ?सैकड़ों वर्षो से हम सब ऐसे ही और कुछ अनजाने तथा कुछ चन्द स्वार्थी तत्वों द्वारा निर्मित परम्पराओं के जाल में जकड़े हुए हैं।

ज़रुरत इस बात की है कि हम ऐसी परम्पराओं और अॅधविश्वासों को अब और ना पनपने दें , और अगली बार ऐसी किसी चीज पर यकीन  करने से पहले सोच लें की कहीं हम जाने – अनजाने कोई अन्धविश्वास रुपी बिल्ली तो नहीं पाल रहे ?

Thursday, October 18, 2012

अपने लिए जिए तो क्या जिए..

आप अपनी जिंदगी किस तरह जीना चाहते हैं? हो सकता है, ये सवाल आपको अटपटा लगे, लेकिन है जरूरी, आखिरकार जिंदगी है आपकी! यकीनन, आप जवाब देंगे — जिंदगी तो अच्छी तरह जीने का ही मन है। यह भाव, ऐसी इच्छा, इस तरह का जवाब बताता है कि आपके मन में सकारात्मकता लबालब है, लेकिन यहीं एक अहम प्रश्न उठता है — जिंदगी क्या है, इसके मायने क्या हैं? इस बारे में 'जीवन का अर्थ' स्तंभ में हम अनगिन बार चर्चा कर चुके हैं और हर बार यही निष्कर्ष सामने आया है कि दूसरों के भले के लिए जो सांसें हमने जी हैं, वही जिंदगी है पर कोई जीवन अर्थवान कब और कैसे हो पाता है, यह जानना बेहद आवश्यक है। 

दरअसल, जीवन एक व्यवस्था है। ऐसी व्यवस्था, जो जड़ नहीं, चेतन है। स्थिर नहीं, गतिमान है। इसमें लगातार बदलाव भी होने हैं। जिंदगी की अपनी एक फिलासफी है, यानी जीवन-दर्शन। सनातन सत्य के कुछ सूत्र, जो बताते हैं कि जीवन की अर्थ किन बातों में है। ये सूत्र हमारी जड़ों में हैं — पुरातन ग्रंथों में, हमारी संस्कृति में, दादा-दादी के किस्सों में, लोकगीतों में। जीवन के मंत्र ऋचाओं से लेकर संगीत के नाद तक समाहित हैं। हम इन्हें कई बार समझ लेते हैं, ग्रहण कर पाते हैं तो कहीं-कहीं भटक जाते हैं और जब-जब ऐसा होता है, जिंदगी की खूबसूरती गुमशुदा हो जाती है।

जीवन की गाड़ी सांसों की पटरी पर सरपट दौड़ती रहे, इसकी सीख भारतीय मनीषा में अच्छी तरह से दी गई है। विशिष्टाद्वैत दर्शन में समझाया गया है कि चित् यानी आत्म और अचित् यानी प्रकृति तव ईश्वर से अलग नहीं है, बल्कि उसका ही विशिष्ट रूप है। आस्थावान लोग इस दार्शनिक बिंदु से अपनी उपस्थिति और महत्व निर्धारित करेंगे, जबकि शैव दर्शन में शिव को पति मानते हुए जीवन को पशु अवस्था में माना गया और पाश यानी बंधन की स्थिति समझाई गई है। यहां शिव की कृपा से बंधन की समाप्ति और 'शिवत्व' की प्राप्ति ही मुक्तिदायी बताई गई है। यह दो उदाहरण भर हैं। दर्शन की इन धाराओं में प्रभु और प्रकृति और बंधन व मुक्ति के संदर्भ समझे जा सकते हैं। हालांकि जिंदगी जीने के नुस्खे तरह-तरह के हैं और दर्शन, यानी सत्य के रूप भी बहुरंगी हैं। चार्वाक का दर्शन ही देखिए। वे इसी जगत और जीवन को सबसे अहम बताते हैं। चार्वाक स्वर्ग और नर्क को खारिज करते हुए, वेदों की प्रामाणिकता पर भी सवाल उठाते हैं और मानते हैं कि कोई अमर आत्मा नहीं होती। आस्थावान लोगों के लिए चार्वाक का दर्शन थोड़ा विचलित करने वाला हो सकता है। वे पृथ्वी, जल, वायु और अग्नि जैसे चार महाभूतों से हमारी देह बनने के उदाहरण देते हैं और बताते हैं कि शरीर यहीं नष्ट भी हो जाता है। 

इन तर्को के साथ चार्वाक की यह बात थोड़ी दिलचस्प भी है — 'यावज्जीवेत् सुखं जीवेत् ऋणं कृत्वा घृतं पिबेत्', यानी जब तक जियो, सुख से जियो, कर्ज लेकर घी पियो..।

तो देखा आपने। जीवन जीने के विविध तरीके, बहुतेरे सत्य और कई रास्ते हमारे सामने हैं। ठीक ऐसे ही, जैसे जिंदगी एक तार पर नहीं चलती। समरेखा पर उम्र नहीं गुजारी जा सकती। हाथ की सब अंगुलियां एक बराबर नहीं होतीं, ऐसे ही जीवन का सत्य भी एक सा नहीं होता। अब प्रश्न वही फिर से उठता है, फिर जीवन के लिए आदर्श क्या है। कौन-सा सत्य? कौन-सा दर्शन? इसका जवाब एक ही है — जिंदगी का वह रास्ता, जो आपके मन, तन को सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर रखे। और यही नहीं, अपने लिए तो कोई पशु भी जी लेता है, जीवन का ऐसा ही पथ श्रेयष्कर है, जो विराट मानव समाज के लिए सुखद और मंगलकारी हो। दर्शन और जीवन की अर्थ तभी है, जब हम इसमें उलझें नहीं, हमारी जिंदगी की गुत्थियां सुलझाते हुए दिव्य मानव बनने की ओर चल पाएं। आप ऐसा करेंगे, यही उम्मीद!

Tuesday, October 9, 2012

बड़ा बनने के लिए बड़ा सोचो


बड़ा बनने के लिए बड़ा सोचो

Think Big in Hindi Motivational Story

बड़ा सोचो

अत्यंत गरीब परिवार का एक  बेरोजगार युवक  नौकरी की तलाश में  किसी दूसरे शहर जाने के लिए  रेलगाड़ी से  सफ़र कर रहा था | घर में कभी-कभार ही सब्जी बनती थी, इसलिए उसने रास्ते में खाने के लिए सिर्फ रोटीयां ही रखी थी |

आधा रास्ता गुजर जाने के बाद उसे भूख लगने लगी, और वह टिफिन में से रोटीयां निकाल कर खाने लगा | उसके खाने का तरीका कुछ अजीब था , वह रोटी का  एक टुकड़ा लेता और उसे टिफिन के अन्दर कुछ ऐसे डालता मानो रोटी के साथ कुछ और भी खा रहा हो, जबकि उसके पास तो सिर्फ रोटीयां थीं!! उसकी इस हरकत को आस पास के और दूसरे यात्री देख कर हैरान हो रहे थे | वह युवक हर बार रोटी का एक टुकड़ा लेता और झूठमूठ का टिफिन में डालता और खाता | सभी सोच रहे थे कि आखिर वह युवक ऐसा क्यों कर रहा था | आखिरकार  एक व्यक्ति से रहा नहीं गया और उसने उससे पूछ ही लिया की भैया तुम ऐसा क्यों कर रहे हो, तुम्हारे पास सब्जी तो है ही नहीं फिर रोटी के टुकड़े को हर बार खाली टिफिन में डालकर ऐसे खा रहे हो मानो उसमे सब्जी हो |

तब उस युवक  ने जवाब दिया, "भैया , इस खाली ढक्कन में सब्जी नहीं है लेकिन मै अपने मन में यह सोच कर खा रहा हू की इसमें बहुत सारा आचार है,  मै आचार के साथ रोटी खा रहा हू  |"

 फिर व्यक्ति ने पूछा , "खाली ढक्कन में आचार सोच कर सूखी रोटी को खा रहे हो तो क्या तुम्हे आचार का स्वाद आ रहा है ?"

"हाँ, बिलकुल आ रहा है , मै रोटी  के साथ अचार सोचकर खा रहा हूँ और मुझे बहुत अच्छा भी लग रहा है |", युवक ने जवाब दिया|

 उसके इस बात को आसपास के यात्रियों ने भी सुना, और उन्ही में से एक व्यक्ति बोला , "जब सोचना ही था तो तुम आचार की जगह पर मटर-पनीर सोचते, शाही गोभी सोचते….तुम्हे इनका स्वाद मिल जाता | तुम्हारे कहने के मुताबिक तुमने आचार सोचा तो आचार का स्वाद आया तो और स्वादिष्ट चीजों के बारे में सोचते तो उनका स्वाद आता | सोचना ही था तो भला  छोटा क्यों सोचे तुम्हे तो बड़ा सोचना चाहिए था |"

मित्रो इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है की जैसा सोचोगे वैसा पाओगे | छोटी सोच होगी तो छोटा मिलेगा, बड़ी सोच होगी तो बड़ा मिलेगा | इसलिए जीवन में हमेशा बड़ा सोचो | बड़े सपने देखो , तो हमेश बड़ा ही पाओगे | छोटी सोच में भी उतनी ही उर्जा और समय खपत होगी जितनी बड़ी सोच में, इसलिए जब सोचना ही है तो हमेशा बड़ा ही सोचो|

Saturday, October 6, 2012

संगती का असर

संगती का असर

Sangati Ka Asar Motivational Hindi Story

संगती का असर

एक बार एक राजा शिकार के उद्देश्य से अपने काफिले के साथ किसी जंगल से गुजर रहा था | दूर दूर तक शिकार नजर नहीं आ रहा था, वे धीरे धीरे घनघोर जंगल में प्रवेश करते गए | अभी कुछ ही दूर गए थे की उन्हें कुछ डाकुओं के छिपने की जगह दिखाई दी | जैसे ही वे उसके पास पहुचें कि पास के पेड़ पर बैठा तोता बोल पड़ा – ,
" पकड़ो पकड़ो एक राजा आ रहा है इसके पास बहुत सारा सामान है लूटो लूटो जल्दी आओ जल्दी आओ |"

तोते की आवाज सुनकर सभी डाकू राजा की और दौड़ पड़े | डाकुओ को अपनी और आते देख कर राजा और उसके सैनिक दौड़ कर भाग खड़े हुए | भागते-भागते कोसो दूर निकल गए | सामने एक बड़ा सा पेड़ दिखाई दिया | कुछ देर सुस्ताने के लिए उस पेड़ के पास चले गए , जैसे ही पेड़ के पास पहुचे कि उस पेड़ पर बैठा तोता बोल पड़ा – आओ राजन हमारे साधू महात्मा की कुटी में आपका स्वागत है | अन्दर आइये पानी पीजिये और विश्राम कर लीजिये | तोते की इस बात को सुनकर राजा हैरत में पड़ गया , और सोचने लगा की एक ही जाति के दो प्राणियों का व्यवहार इतना अलग-अलग कैसे हो सकता है | राजा को कुछ समझ नहीं आ रहा था | वह तोते की बात मानकर अन्दर साधू की कुटिया की ओर चला गया, साधू महात्मा को प्रणाम कर उनके समीप बैठ गया और अपनी सारी कहानी सुनाई | और फिर धीरे से पूछा, "ऋषिवर इन दोनों तोतों के व्यवहार में आखिर इतना अंतर क्यों है |"

साधू महात्मा धैर्य से सारी बातें सुनी और बोले ," ये कुछ नहीं राजन बस संगति का असर है | डाकुओं के साथ रहकर तोता भी डाकुओं की तरह व्यवहार करने लगा है और उनकी ही भाषा बोलने लगा है | अर्थात जो जिस वातावरण में रहता है वह वैसा ही बन जाता है कहने का तात्पर्य यह है कि मूर्ख भी विद्वानों के साथ रहकर विद्वान बन जाता है और अगर विद्वान भी मूर्खों के संगत में रहता है तो उसके अन्दर भी मूर्खता आ जाती है | इसिलिय हमें संगती सोच समझ कर करनी चाहिए |

Monday, September 24, 2012

गाँधी जी के जीवन के प्रेरक प्रसंग

Mahatma Gandhi Essay in Hindi

राष्ट्र पिता महात्मा गाँधी

 

गाँधी जी के जीवन के प्रेरक प्रसंग 

प्रसंग 1

गाँधी जी देश भर में भ्रमण कर चरखा संघ के लिए धन इकठ्ठा कर रहे थे. अपने दौरे के दौरान वे ओड़िसा में किसी सभा को संबोधित करने पहुंचे . उनके भाषण के बाद एक बूढी गरीब महिला खड़ी हुई, उसके बाल सफ़ेद हो चुके थे , कपडे फटे हुए थे और वह कमर से झुक कर चल  रही थी , किसी तरह वह भीड़ से होते हुए गाँधी जी के पास तक पहुची.

" मुझे गाँधी जी को देखना है." उसने आग्रह किया और उन तक पहुच कर उनके पैर छुए.

फिर उसने अपने साड़ी के पल्लू में बंधा एक  ताम्बे का सिक्का निकाला और गाँधी जी के चरणों में रख दिया. गाँधी जी ने सावधानी से सिक्का उठाया और अपने पास रख लिया. उस समय चरखा संघ का कोष जमनालाल बजाज संभाल रहे थे. उन्होंने गाँधी जे से वो सिक्का माँगा, लेकिन गाँधी जी ने उसे देने से माना कर दिया.

" मैं चरखा संघ के लिए हज़ारो रूपये के चेक संभालता हूँ", जमनालाल जी हँसते हुए कहा " फिर भी आप मुझपर इस सिक्के को लेके यकीन नहीं कर रहे हैं."

" यह ताम्बे का सिक्का उन हज़ारों से कहीं कीमती है," गाँधी जी बोले.

" यदि किसी के पास लाखों हैं और वो हज़ार-दो हज़ार दे देता है तो उसे कोई फरक नहीं पड़ता. लेकिन ये सिक्का शायद उस औरत की कुल जमा-पूँजी थी. उसने अपना ससार धन दान दे दिया. कितनी उदारता दिखाई उसने…. कितना बड़ा बलिदान दिया उसने!!! इसीलिए इस ताम्बे के सिक्के का मूल्य मेरे लिए एक करोड़ से भी अधिक है."

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प्रसंग 2

रात बहुत काली थी और मोहन डरा हुआ था. हमेशा से ही उसे भूतों से डर लगता था. वह जब भी अँधेरे में अकेला होता उसे लगता की कोई भूत आसा-पास है और कभी भी उसपे झपट पड़ेगा. और आज तो इतना अँधेरा था कि कुछ भी स्पष्ठ नहीं दिख रहा था , ऐसे में मोहन को एक कमरे से दूसरे कमरे में जाना था.

वह हिम्मत कर के कमरे से निकला ,पर उसका दिल जोर-जोर से धडकने लगा और चेहरे पर डर के भाव आ गए. घर में काम करने वाली रम्भा वहीँ दरवाजे पर खड़ी यह सब देख रही थी.

" क्या हुआ बेटा?" , उसने हँसते हुए पूछा.

" मुझे डर लग रहा है दाई,"  मोहन ने उत्तर दिया.

" डर, बेटा किस चीज का डर ?"

" देखिये कितना अँधेरा है ! मुझे भूतों से डर लग रहा है!" मोहन सहमते हुए बोला.

रम्भा ने प्यार से मोहन का सर सहलाते हुए कहा, " जो कोई भी अँधेरे से डरता है वो मेरी बात सुने: राम जी  के बारे में सोचो और कोई भूत तुम्हारे निकट आने की हिम्मत नहीं करेगा. कोई तुम्हारे सर का बाल तक नहीं छू पायेगा. राम जी तुम्हारी  रक्षा करेंगे."

रम्भा के शब्दों ने मोहन को हिम्मत दी. राम नाम लेते हुए वो कमरे से निकला, और उस दिन से मोहन ने कभी खुद को अकेला नहीं समझा और भयभीत नहीं हुआ. उसका विश्वास था कि जब तक राम उसके साथ हैं उसे डरने की कोई ज़रुरत नहीं.

इस विश्वास ने गाँधी जी को जीवन भर शक्ति दी, और मरते वक़्त भी उनके मुख से राम नाम ही निकला.

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प्रसंग 3

कलकत्ता में हिन्दू- मुस्लिम दंगे भड़के हुए थे. तमाम प्रयासों के बावजूद लोग शांत नहीं हो रहे थे. ऐसी स्थिति में गाँधी जी वहां पहुंचे और एक मुस्लिम मित्र के यहाँ ठहरे. उनके पहुचने से दंगा कुछ शांत हुआ लेकिन कुछ ही दोनों में फिर से आग भड़क उठी. तब गाँधी जी ने आमरण अनशन करने का निर्णय लिया और 31-Aug-1947 को अनशन पर बैठ गए. इसी दौरान एक दिन एक अधेड़ उम्र का आदमी उनके पास पहुंचा और बोला , " मैं तुम्हारी मृत्यु का पाप अपने सर पर नहीं लेना चाहता, लो रोटी खा लो ."

और फिर अचानक ही वह रोने लगा, " मैं मरूँगा तो नर्क जाऊँगा!!"

"क्यों ?", गाँधी जी ने विनम्रता से पूछा.

" क्योंकि मैंने एक आठ साल के मुस्लिम लड़के की जान ले ली."

" तुमने उसे क्यों मारा ?", गाँधी जी ने पूछा.

" क्योंकि उन्होंने मेरे मासूम बच्चे को जान से मार दिया .", आदमी रोते हुए बोला.

गाँधी जी ने कुछ देर सोचा और फिर बोले," मेरे पास एक उपाय है."

आदमी आश्चर्य से उनकी तरफ देखने लगा .

" उसी उम्र का एक लड़का खोजो जिसने दंगो में अपने मात-पिता खो दिए हों, और उसे अपने बच्चे की तरह पालो. लेकिन एक चीज सुनिश्चित कर लो की वह एक मुस्लिम होना चाहिए और उसी तरह बड़ा किया जाना चाहिए.", गाँधी जी ने अपनी बात ख़तम की.

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Thursday, September 13, 2012

गाड़ी चलाते वक्त आपके पास कौन-कौन से कागज़ होने चाहियें ?


क्या आप जानते हैं?
गाड़ी चलाते वक्त आपके पास कौन-कौन से कागज़ होने चाहियें ?
   Traffic Police का एक आसान शिकार 
अक्सर गाड़ी से चलते वक्त एक डर  सा लगा रहता है की कहीं पुलिस वाला न रोक ले. और ऐसा नहीं है की ये डर  सिर्फ उन्ही लोगों को होता है जिनके पास ज़रूरी papers नहीं होते हैं. भाई ये Universal डर है, हर एक आम भारतीय नागरिक को सताता है. मैंने सोचा की चलो आज इस डर से डरने की बजाय इस डर से लड़ते हैं…आखिर डर के आगे ही तो जीत है……अब मैं इस डर को दूर कर पाने में कितना कामयाब हुआ, इसका पता तो आपको इस  Post  के अंत तक ही चलेगा . तो आइये सबसे पहले नज़र डालते हैं उन necessary papers/documents पर जो गाड़ी चलाते वक्त आपके पास होने ही चाहिए: 
The information given here is as per  Motor Vehicles Act 1988

SNo.
Important Papers
ना होने पे लगने वाला Fine
1
Driving License
Rs. 500-/- या 3 महीने की जेल या दोनों
2
Vehicle Registration Certificate
Rs. 2000-/-
3
Insurance Certificate
Rs. 1000-/- या 3 महीने की जेल या दोनों
4
Road Tax Papers
( Not sure)
5
P.U.C* Certificate
Rs. 100













*PUC:  Pollution Under Control Certificate.
                    
नोट :
  • केवल वर्दीधारी (In-Uniform)  पुलिसवाला  या RTO का कोई ऑफिसर ही आपसे papers demand कर सकता है.
  • ज़रूरी नहीं है की आप सारे original documents ही ले के चलें. आप उनकी XEROX  copy  किसी gazetted officer सेattest करा कर भी रख सकते हैं. पर Driving License  original ही होना चाहिए.
  • यदि आपका Driving License ज़ब्त हो गया हो तो आप उसकी receipt ज़रूर साथ ले के चलें.
  • Helmet या Seat belt के बिना Rs100 fine लगेगा.
इतना सब कुछ पता करने के बाद मुझे लगा कि मैं खामखा ही Police से डरता था ,मेरे पास तो सारे कागज़ात हैं. लेकिन तभी मेरी नज़र Delhi Traffic Police कि website   पर पड़ी और फिर मैं समझ गया कि क्यों Traffic Police के हत्थे चढते ही बड़े-बड़े सेठ भी Sir..Sir…करने  लगते हैं. लीजिए आप भी एक नज़र डाल लीजिए की आप  कितने तरह से गाड़ी चलाते वक्त कानून की नज़र में गुनाहगार बन सकते हैं:
Offense and Penal Sections
S.No.
Offence description
Penal section
Amount
1.
Red Light Jumping
119/177 MVA
 Rs. 100
2.
Driving Left Hand Drive without Indicator
120/177 MVA
Rs. 100
3.
Improper and Obstructive Parking
122/177 MVA
Rs. 100
4.
Travelling on Running Board (Driver)
123(1)/177 MVA
Rs. 100
5.
Travelling on Running Board (Passenger)
123(2)/177 MVA
Rs. 100
6.
Triple Riding
128/177 MVA
Rs. 100
7.
Driving without Helmet
129/177 MVA
Rs. 100
8.
Not Displaying Number Plate
50/177 MVA
Rs. 100
9.
Misbehaviour by TSR/Taxi Driver
11.3/177 MVA
Rs. 100
10.
Over Charging by TSR/Taxi
11.8/177 MVA
Rs. 100
11.
Refusal by TSR/Taxi Driver
11.9/177 MVA
Rs. 100
12.
Driving without Light (After Sunset)
105/177 MVA
Rs. 100
13.
Driving without Horn
119(1)/177 MVA
Rs. 100
14.
Driving without Silencer
120/190(2) CMVR
Rs. 100
15.
Driving with a Defective Number Plate
50/177 MVA
Rs. 100
16.
Violation of Stop Line
113(1)/177 MVA
Rs. 100
17.
Section 177 IInd or subsequent Offence
18.
Disobeying Lawful Directions
132/179 MVA
Rs. 1000
19.
Allowing unauthorised person to drive
5/180 MVA
Rs. 1000
20.
Driving without Licence
3/181 MVA
Rs. 500
21.
Driving by Minors
4/181 MVA
Rs. 500
22.
Over Speeding (1st Offence)
112/183(1) MVA
Rs. 400
23.
Over Speeding (Subsequent Offence)
112/183(1) MVA
Rs. 300
24.
Abetment of Over Speeding
112/183(2) MVA
Rs. 300
25.
Section 183(2) (2nd or Subsequent Offence)
112/183(2) MVA
26.
Driving Dangerously (1st Offence)
184 MVA
Rs. 1000
27.
Driving Dangerously (2nd Offence)
184 (2) MVA
28.
Using `Unregistered Vehicles' or Displaying "Applied for"
39/192 MVA
Rs. 2000
29.
Section 192(1) (2nd or subsequent offence)
30.
Violation of Yellow Line
18(II)R.R.R./119/117 MVA
31.
Violation of Restriction of Time on HTV's/Care on Various Roads
115/194 MVA
Rs. 2000
32.
Section 194(1) (2nd or Subsequent Offence)
33.
Violation of mandatory signs (One Way No Right Turn, No Left TurnNo Horn)
119/177 MVA
Rs. 100
34.
Excess Smoke
99(1)(a)/177 MVA
Rs. 100
35.
Blowing of Pressure Horn
96(1)/177 MVA
Rs. 100
36.
Conductor without Uniform
23(1)/177 MVA
Rs. 100
37.
Driver without Uniform
7/177 MVA
Rs. 100
38.
Conductor without Badge
22(1)/177 MVA
Rs. 100
39.
Carrying Passengers on Goods Vehicles
84(2)/177 MVA
Rs. 100
40.
Carrying Goods on Passengers Vehicle
84(3)/177 MVA
Rs. 100
41.
Use of Coloured Light on Motor Vehicle
97(2)/177 MVA
Rs. 100
42.
Smoking in the Vehicles
86.1(5)/177 MVA
Rs. 100
43.
Using Mobile Phone while Driving
184 MVA
Rs. 1000
44.
Wrong Overtaking
6(1)RRR/177 MVA
Rs. 100
मुझे जो ज़रा ज्यादा ज़रूरी लगे उन्हें मैंने Red Color से highlight कर दिया है. 
और एक बात और. थोड़ी और छानबीन करने पर पता चला की इसके अलावा भी सैकड़ों तरीके हैं जो आपको गलत साबित कर सकते हैं ,इसलिए मेरी मानिए और इस Universal डर को कायम रहने दीजिए. और भूल कर भी traffic police से कभी पंगा मत लीजिए .